विकास की अवधारणा एवं इसका अधिगम से सम्बन्ध
प्रस्तावना
मानव जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक निरंतर परिवर्तन की प्रक्रिया है। ये परिवर्तन शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक रूप से होते हैं। इन सभी परिवर्तनों के समग्र रूप को विकास कहा जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान में विकास का अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि अधिगम विकास पर ही आधारित होता है।
विकास की अवधारणा
विकास वह निरंतर एवं क्रमबद्ध प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के व्यवहार, क्षमताओं एवं व्यक्तित्व में परिवर्तन होता है।
परिभाषाएँ
वुडवर्थ – “विकास व्यवहार में होने वाले प्रगतिशील परिवर्तन हैं।”
क्रो एवं क्रो – “विकास गर्भावस्था से मृत्यु तक चलने वाली प्रक्रिया है।”
वृद्धि एवं विकास का अर्थ
वृद्धि (Growth)
शरीर में होने वाले मात्रात्मक परिवर्तन
जैसे – कद, वजन, मांसपेशियों की वृद्धि
इसे मापा जा सकता है
विकास (Development)
व्यक्ति में होने वाले गुणात्मक परिवर्तन
जैसे – बुद्धि, भाषा, सोच, भावनाएँ
इसे प्रत्यक्ष मापा नहीं जा सकता
वृद्धि एवं विकास में अंतर
वृद्धि विकास
मात्रात्मक गुणात्मक
शारीरिक शारीरिक + मानसिक
सीमित जीवनपर्यंत
मापनीय अमापनीय
विकास की विभिन्न अवस्थाएँ
1️⃣ गर्भावस्था अवस्था
जन्म से पूर्व का विकास
शारीरिक अंगों का निर्माण
2️⃣ शैशवावस्था (0–2 वर्ष)
तीव्र शारीरिक वृद्धि
इंद्रियों का विकास
भावनात्मक जुड़ाव
3️⃣ बाल्यावस्था (3–12 वर्ष)
भाषा, बुद्धि एवं सामाजिक विकास
अधिगम की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवस्था
4️⃣ किशोरावस्था (13–18 वर्ष)
शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तन
भावनात्मक असंतुलन
आत्म-परिचय का विकास
5️⃣ प्रौढ़ावस्था
मानसिक परिपक्वता
सामाजिक उत्तरदायित्व
अधिगम (Learning) का अर्थ
अधिगम वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अनुभव एवं अभ्यास से व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन होता है।
परिभाषाएँ
स्किनर – “अधिगम व्यवहार में स्थायी परिवर्तन है।”
गैग्ने – “अनुभव द्वारा प्राप्त क्षमता अधिगम है।”
विकास और अधिगम का संबंध
विकास अधिगम की पूर्व शर्त है।
अधिगम विकास को गति देता है।
अधिगम विकासात्मक अवस्था के अनुसार होता है।
दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
शैक्षिक महत्व
शिक्षक को बालक की विकास अवस्था जाननी चाहिए
पाठ्यक्रम विकास स्तर के अनुसार हो
बाल-केंद्रित शिक्षण आवश्यक
व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान
निष्कर्ष
विकास और अधिगम एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। विकास के बिना अधिगम संभव नहीं तथा अधिगम के बिना विकास अधूरा है। सफल शिक्षा के लिए दोनों की समझ अनिवार्य है।

0 टिप्पणियाँ
Thank you for your valuable response. Thank you so much.